Hum Tere Shahar Mein Aaye Hain lyrics writer is Qaisar Ul Jafri and this song sung by ghazal singer Ghulam Ali sahab.

Song Details

Song: Hum Tere Shahar Mein Aaye Hain
Singer: Ghulam Ali
Lyricist: Qaisar Ul Jafri
Genre: Ghazal

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Hum Tere Shahar Mein Aaye Hain Lyrics

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह x2

मेरी मंज़िल है कहाँ,
मेरा ठिकाना है कहाँ

मेरी मंज़िल है कहाँ, मेरा ठिकाना है कहाँ
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह x2

अपनी आँखों में छुपा रक्खे हैं, जुगनू मैंने

अपनी आँखों में छुपा रक्खे हैं, जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं, आँसू मैंने
मेरी आँखों को भी, बरसात का मौका दे दे

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह x2

आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले

कँप-कँपाते हुए होठों की, शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ए-ख़यालात का मौका दे दे

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह x2

भूलना था तो ये इक़रार किया ही क्यूँ था,

भूलना था तो ये इक़रार किया ही क्यूँ था,
बेवफ़ा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था,
सिर्फ़ दो चार, सवालात का मौका दे दे

हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफ़िर की तरह x2

सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में आए हैं, मुसाफ़िर की तरह…

हम तेरे शहर में आए हैं, मुसाफ़िर की तरह…X2

Hum Tere Shahar Mein Aaye Hain Lyrics End…

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